Tuesday, May 13, 2008

पुष्प की अभिलाषा (Desire of a Flower)

One of my favourite poem when I was in the school:
चाह नही मैं सुरबाला के
गहनों में गूथां जाऊँ
चाह नही मैं प्रेमी माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ

चाह नही सम्राटों के
शव पर हे हरि डाला जाऊँ
चाह नही देवों के सिर पर
चढूं भाग्य पर इतराऊं

मुझे तोड़ लेना बनमाली
उस पथ पर तुम देना फ़ेंक
मातृभुमि पर शीश चढाने
जिस पथ जाएँ वीर अनेक
- माखन लाल चतुर्वेदी

1 comment:

Pilot-Pooja said...

One of my favorite school poems too!!